Right To Health Conclave का शुभारंभ, एमपी इस मामले में होगा नंबर वन

भोपाल। भोपाल के मिंटो हाॅल में मुख्यमंत्री कमलनाथ ने दो दिवसीय राइट टू हेल्थ काॅनक्लेव का शुभारंभ किया। इस मौके पर राज्य के स्वास्थ्य मंत्री तुलसी सिलावट ने कहा कि, इस योजना के जरिए व्यक्ति यह जान सकेगा कि यह सरकार शिक्षा, स्वास्थ्य के प्रति कितनी संवेदनशील है। स्वास्थ्य का अधिकार अब कानून बनने जा रहा है, यह काम केवल सीएम कमलनाथ ही कर सकते थे। उन्होंने कहा कि, मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री कमलनाथ को एक चिंता थी। जिसमें सभी के स्वास्थ्य की बात शामिल थी, इस दिशा में राइट टू हेल्थ कारगर साबित होगा।वो यहीं नहीं रूके, योजना को लेकर उन्होंने कहा कि, इस पर हर साल 1900 करोड़ रुपए खर्च होंगे। स्वास्थ्य और शिक्षा के प्रति ये सरकार गंभीर है। अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि मुख्यमंत्री कमलनाथ ने स्वास्थ्य विभाग का बजट भी बढ़ा दिया है। अगले दो दिन तक हेल्थ एक्सपर्ट्स इस विषय पर मंथन करेंगे और भविष्य में प्रदेश के लोगों को कैसी स्वास्थ्य सुविधाएं मिलेंगी। इसका रोडमैप तैयार होगा। देश में मध्य प्रदेश ऐसा पहला राज्य होगा जो अपने नागरिकों को राइट टू हेल्थ देगा।राइट टू हेल्थ योजना के जरिये सरकार प्रदेश के लोगों को कैशलेस इलाज की सुविधा देने जा रही है। मौजूदा आयुष्मान योजना में 1 करोड़ 42 लाख परिवार कवर हो रहे हैं। प्रति परिवार हर साल 5 लाख रुपए तक का नि:शुल्क इलाज दिया जा रहा है। करीब 46 लाख परिवार अभी योजना के दायरे में नहीं हैं। इनमें ज्यादातर नौकरी पेशा या फिर व्यवसायी हैं। अब इन्हें भी इस योजना के दायरे में लाने की तैयारी है। अब इस बात पर मंथन किया जा रहा है कि कैशलेस बीमा के लिए इनसे कुछ राशि ली जाए या नहीं।राइट टू हेल्थ के तहत योजना में मानसिक तनाव कम करने के लिए दफ्तरों में दोपहर के भोजन के पहले आधे घंटे तक ध्यान, आध्यात्म या मनोरंजन का सत्र रखने की तैयारी है।